एकांकी — भाग ३ (चरम)
उमा पान देने आती है — और उसका सोने की रिम वाला चश्मा दिख जाता है। भेद खुल जाता है कि वह पढ़ी-लिखी है। फिर गोपालप्रसाद उसे "बोलने" को कहते हैं — और उमा का स्वाभिमान फूट पड़ता है।
रुकिए और सोचिए —
उमा अपनी तुलना "कुर्सी-मेज" और "भेड़-बकरियों" से क्यों करती है?
एकांकी का शीर्षक "रीढ़ की हड्डी" दो पात्रों के लिए दो अलग अर्थों में आता है। दोनों अर्थ पहचानिए।
Take a moment to form your answer before reading further.
Q1.उमा का भेद कैसे खुला कि वह पढ़ी-लिखी है?
उमा पान देने आती है — और उसका सोने की रिम वाला चश्मा दिख जाता है। भेद खुल जाता है कि वह पढ़ी-लिखी है। फिर गोपालप्रसाद उसे "बोलने" को कहते हैं — और उमा का स्वाभिमान फूट पड़ता है।
रुकिए और सोचिए —
उमा अपनी तुलना "कुर्सी-मेज" और "भेड़-बकरियों" से क्यों करती है?
एकांकी का शीर्षक "रीढ़ की हड्डी" दो पात्रों के लिए दो अलग अर्थों में आता है। दोनों अर्थ पहचानिए।
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Q1.उमा का भेद कैसे खुला कि वह पढ़ी-लिखी है?