अपठित बोध — रणनीति और पहला गद्यांश
जवाब इन्हीं पंक्तियों में छिपा है
अपठित बोध — गद्यांश-काव्यांश का रहस्य
परीक्षा में एक हिस्सा ऐसा होता है जो तुम्हारी पाठ्यपुस्तक से बिलकुल नहीं आता। परीक्षक तुम्हें एक ऐसा गद्यांश या काव्यांश देता है जिसे तुमने पहले कभी नहीं पढ़ा — और उस पर प्रश्न पूछता है। इसे अपठित बोध कहते हैं, और यह अच्छे-ख़ासे अंक रखता है (खंड "अ", 14 अंक)।
पर घबराने की कोई बात नहीं! इसमें एक ख़ुशख़बरी छिपी है: तुम्हें कुछ याद नहीं रखना पड़ता। हर जवाब इन्हीं पंक्तियों में, तुम्हारी आँखों के सामने बैठा होता है। बस ध्यान से पढ़ना है और ढूँढ लेना है।
"अपठित" से डरो मत
अपठित गद्यांश कोई जाल नहीं है। ध्यान से पढ़ने वाले के लिए यह पूरे पेपर के सबसे आसान अंक हैं — क्योंकि यहाँ जवाब भाग नहीं सकते। वे इन्हीं पंक्तियों में मौजूद रहते हैं।
किसी भी अपठित को हल करने के 4 कदम
- पूरा गद्यांश एक बार शांति से पढ़ो। हर कठिन शब्द पर मत अटको — पहले पूरी बात का अंदाज़ा लो।
- अब प्रश्न पढ़ो। अब तुम्हें पता है कि क्या ढूँढना है।
- वापस जाकर हर जवाब पंक्तियों में ढूँढो और उसके नीचे लाइन खींच दो। गद्यांश ही तुम्हारी "उत्तर-कुंजी" है।
- जवाब गद्यांश से लिखो, अपने मन से नहीं। भले तुम असहमत हो, वही लिखो जो गद्यांश कहता है। अपनी राय मत जोड़ो।
चलो, पहला गद्यांश आज़माते हैं
नीचे एक गद्यांश दिया है। इसे ठीक वैसे ही पढ़ो जैसे अभी सीखा — पहले पूरा, फिर जवाब। कोई जल्दी नहीं।
अपठित बोध — गद्यांश-काव्यांश का रहस्य
परीक्षा में एक हिस्सा ऐसा होता है जो तुम्हारी पाठ्यपुस्तक से बिलकुल नहीं आता। परीक्षक तुम्हें एक ऐसा गद्यांश या काव्यांश देता है जिसे तुमने पहले कभी नहीं पढ़ा — और उस पर प्रश्न पूछता है। इसे अपठित बोध कहते हैं, और यह अच्छे-ख़ासे अंक रखता है (खंड "अ", 14 अंक)।
पर घबराने की कोई बात नहीं! इसमें एक ख़ुशख़बरी छिपी है: तुम्हें कुछ याद नहीं रखना पड़ता। हर जवाब इन्हीं पंक्तियों में, तुम्हारी आँखों के सामने बैठा होता है। बस ध्यान से पढ़ना है और ढूँढ लेना है।
"अपठित" से डरो मत
अपठित गद्यांश कोई जाल नहीं है। ध्यान से पढ़ने वाले के लिए यह पूरे पेपर के सबसे आसान अंक हैं — क्योंकि यहाँ जवाब भाग नहीं सकते। वे इन्हीं पंक्तियों में मौजूद रहते हैं।
किसी भी अपठित को हल करने के 4 कदम
- पूरा गद्यांश एक बार शांति से पढ़ो। हर कठिन शब्द पर मत अटको — पहले पूरी बात का अंदाज़ा लो।
- अब प्रश्न पढ़ो। अब तुम्हें पता है कि क्या ढूँढना है।
- वापस जाकर हर जवाब पंक्तियों में ढूँढो और उसके नीचे लाइन खींच दो। गद्यांश ही तुम्हारी "उत्तर-कुंजी" है।
- जवाब गद्यांश से लिखो, अपने मन से नहीं। भले तुम असहमत हो, वही लिखो जो गद्यांश कहता है। अपनी राय मत जोड़ो।
चलो, पहला गद्यांश आज़माते हैं
नीचे एक गद्यांश दिया है। इसे ठीक वैसे ही पढ़ो जैसे अभी सीखा — पहले पूरा, फिर जवाब। कोई जल्दी नहीं।