कहानी — भाग १
भाग १ — ताई, मिट्टू और सूना बड़ा घर
कहानी एक अकेली वृद्धा "ताई" से शुरू होती है, जो गाँव के बीच एक सूने बड़े घर में अपने तोते मिट्टू के साथ रहती हैं। दोनों एक-दूसरे का सहारा हैं।
गहरी साँस लेकर ताई कहतीं, "भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?" और बंद पिंजड़े में अपने पंखों को , उछल-कूद मचाता मिट्टू उत्तर देता, "राम-राम कहो, सीताराम कहो।" अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे। बहू-बेटे गाँव का छोड़कर शहरों के होकर रह गए। बेटियाँ अपने-अपने हाथ पीले कराकर अपनी गृहस्थी में रम गईं।
भला हो गनपत का, जिसने ताई के सूनेपन को सहारा दे दिया था, वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था। ताई की सारी मिट्टू पर बरस पड़ी।
रुकिए और सोचिए —
ताई के बड़े घर को "सूना खंडहर" क्यों कहा गया है?
सुबह पौ फटते ही मिट्टू अपना पाठ शुरू कर देते— "हर हर गंगे! सीताराम बोल! मिट्टू राम राम!" ताई उठ बैठतीं। लाड़ से मिट्टू को आशीष देतीं— "जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ।" ताई पूछतीं, "मिट्टू! अब कैसे कटेगी?" और नौजवान मिट्टू ताई के बुढ़ापे का सहारा बनकर दम-खम के साथ उन्हें देते— "कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!"
ताई और मिट्टू का संबंध सिर्फ़ "मालिक और पालतू" का नहीं है — लेखक इसे माँ-बेटे जैसा क्यों दिखाते हैं? इससे कहानी में क्या जुड़ता है?
Take a moment to form your answer before reading further.
Q1.ताई के पास मिट्टू को कौन लाया था?
भाग १ — ताई, मिट्टू और सूना बड़ा घर
कहानी एक अकेली वृद्धा "ताई" से शुरू होती है, जो गाँव के बीच एक सूने बड़े घर में अपने तोते मिट्टू के साथ रहती हैं। दोनों एक-दूसरे का सहारा हैं।
गहरी साँस लेकर ताई कहतीं, "भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?" और बंद पिंजड़े में अपने पंखों को , उछल-कूद मचाता मिट्टू उत्तर देता, "राम-राम कहो, सीताराम कहो।" अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे। बहू-बेटे गाँव का छोड़कर शहरों के होकर रह गए। बेटियाँ अपने-अपने हाथ पीले कराकर अपनी गृहस्थी में रम गईं।
भला हो गनपत का, जिसने ताई के सूनेपन को सहारा दे दिया था, वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था। ताई की सारी मिट्टू पर बरस पड़ी।
रुकिए और सोचिए —
ताई के बड़े घर को "सूना खंडहर" क्यों कहा गया है?
सुबह पौ फटते ही मिट्टू अपना पाठ शुरू कर देते— "हर हर गंगे! सीताराम बोल! मिट्टू राम राम!" ताई उठ बैठतीं। लाड़ से मिट्टू को आशीष देतीं— "जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ।" ताई पूछतीं, "मिट्टू! अब कैसे कटेगी?" और नौजवान मिट्टू ताई के बुढ़ापे का सहारा बनकर दम-खम के साथ उन्हें देते— "कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!"
ताई और मिट्टू का संबंध सिर्फ़ "मालिक और पालतू" का नहीं है — लेखक इसे माँ-बेटे जैसा क्यों दिखाते हैं? इससे कहानी में क्या जुड़ता है?
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Q1.ताई के पास मिट्टू को कौन लाया था?