परिचय — लेखक से मिलिए
कभी आपने किसी बुज़ुर्ग को अकेले रहते देखा है — जिसके बच्चे दूर शहर में बस गए हों? उनका दिन कैसे बीतता होगा? और अगर उनका इकलौता साथी कोई पालतू पंछी या जानवर हो, तो उसका छिन जाना उनके लिए क्या होगा?
अपने मोहल्ले के किसी अकेले बुज़ुर्ग के बारे में सोचिए।
आधुनिक हिंदी कहानी के सशक्त हस्ताक्षर। पहला कहानी-संग्रह कोसी का घटवार (1958)। अन्य रचनाएँ — साथ के लोग, हलवाहा, मेरा पहाड़, एक पेड़ की याद आदि। उन्होंने ग्रामीण-शहरी मध्यवर्गीय जीवन-मूल्यों और मज़दूरों के जीवन-संघर्ष को प्रमुखता से उभारा।
ग्रामीण जीवन के कथाकार
शेखर जोशी की कहानियाँ पहाड़ और गाँव के सामान्य लोगों — मज़दूर, बुज़ुर्ग, स्त्रियाँ — के मन को छूती हैं। उनकी भाषा लोकधर्मी (बोल-चाल की, सहज) है, जो गाँव के जीवन को सीधे आपके सामने ला खड़ा करती है।
इस कहानी के दो मुख्य पात्र हैं — ताई (एक अकेली वृद्ध स्त्री) और मिट्टू (उनका पहाड़ी तोता)। पढ़ने से पहले कुछ कठिन शब्द जान लें।
कहानी में आने वाले शब्द — हर कार्ड पलटिए।
Q1.शेखर जोशी का पहला प्रसिद्ध कहानी-संग्रह कौन-सा है?
कभी आपने किसी बुज़ुर्ग को अकेले रहते देखा है — जिसके बच्चे दूर शहर में बस गए हों? उनका दिन कैसे बीतता होगा? और अगर उनका इकलौता साथी कोई पालतू पंछी या जानवर हो, तो उसका छिन जाना उनके लिए क्या होगा?
अपने मोहल्ले के किसी अकेले बुज़ुर्ग के बारे में सोचिए।
आधुनिक हिंदी कहानी के सशक्त हस्ताक्षर। पहला कहानी-संग्रह कोसी का घटवार (1958)। अन्य रचनाएँ — साथ के लोग, हलवाहा, मेरा पहाड़, एक पेड़ की याद आदि। उन्होंने ग्रामीण-शहरी मध्यवर्गीय जीवन-मूल्यों और मज़दूरों के जीवन-संघर्ष को प्रमुखता से उभारा।
ग्रामीण जीवन के कथाकार
शेखर जोशी की कहानियाँ पहाड़ और गाँव के सामान्य लोगों — मज़दूर, बुज़ुर्ग, स्त्रियाँ — के मन को छूती हैं। उनकी भाषा लोकधर्मी (बोल-चाल की, सहज) है, जो गाँव के जीवन को सीधे आपके सामने ला खड़ा करती है।
इस कहानी के दो मुख्य पात्र हैं — ताई (एक अकेली वृद्ध स्त्री) और मिट्टू (उनका पहाड़ी तोता)। पढ़ने से पहले कुछ कठिन शब्द जान लें।
कहानी में आने वाले शब्द — हर कार्ड पलटिए।
Q1.शेखर जोशी का पहला प्रसिद्ध कहानी-संग्रह कौन-सा है?