कविता — भाग २
अब राम बड़ी विनम्रता से उत्तर देते हैं, पर परशुराम का क्रोध बढ़ता ही जाता है। तभी लक्ष्मण मुस्कुराकर व्यंग्य से उत्तर देते हैं — और परशुराम आग-बबूला हो उठते हैं।
हृदयँ कछु बोले श्रीरघुबीरु॥ नाथ संभुधनु । होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥ सेवकु सो जो करै सेवकाई। करि करिअ लराई॥ सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥ सो । न त मारे जैहहिं सब राजा॥
सुनि मुनि बचन लखन । बोले ॥ बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥ । सुनि रिसाइ कह ॥
रे नृप बालक बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम बिदित सकल संसार॥
परशुराम क्रोध में गरजते हैं — "रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार॥" (अरे राजकुमार-बालक! काल के वश में होकर तू सँभलकर नहीं बोलता! शिव का धनुष कोई साधारण धनुही नहीं — पूरा संसार उसे जानता है।)
संवाद की भाव-यात्रा
रुकिए और सोचिए —
राम ने धनुष तोड़ने वाले को "आपका ही कोई दास" क्यों कहा?
एक ही परिस्थिति (परशुराम का क्रोध) पर राम "विनय" का और लक्ष्मण "व्यंग्य/तर्क" का रास्ता अपनाते हैं। आपकी दृष्टि में किसी क्रोधी व्यक्ति को शांत करने के लिए कौन-सा रास्ता बेहतर है, और क्यों?
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Q1.राम के "हृदयँ न हरषु बिषादु" से उनका कौन-सा गुण झलकता है?
अब राम बड़ी विनम्रता से उत्तर देते हैं, पर परशुराम का क्रोध बढ़ता ही जाता है। तभी लक्ष्मण मुस्कुराकर व्यंग्य से उत्तर देते हैं — और परशुराम आग-बबूला हो उठते हैं।
हृदयँ कछु बोले श्रीरघुबीरु॥ नाथ संभुधनु । होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥ सेवकु सो जो करै सेवकाई। करि करिअ लराई॥ सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥ सो । न त मारे जैहहिं सब राजा॥
सुनि मुनि बचन लखन । बोले ॥ बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥ । सुनि रिसाइ कह ॥
रे नृप बालक बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम बिदित सकल संसार॥
परशुराम क्रोध में गरजते हैं — "रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार॥" (अरे राजकुमार-बालक! काल के वश में होकर तू सँभलकर नहीं बोलता! शिव का धनुष कोई साधारण धनुही नहीं — पूरा संसार उसे जानता है।)
संवाद की भाव-यात्रा
रुकिए और सोचिए —
राम ने धनुष तोड़ने वाले को "आपका ही कोई दास" क्यों कहा?
एक ही परिस्थिति (परशुराम का क्रोध) पर राम "विनय" का और लक्ष्मण "व्यंग्य/तर्क" का रास्ता अपनाते हैं। आपकी दृष्टि में किसी क्रोधी व्यक्ति को शांत करने के लिए कौन-सा रास्ता बेहतर है, और क्यों?
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Q1.राम के "हृदयँ न हरषु बिषादु" से उनका कौन-सा गुण झलकता है?