कविता — भारति, जय, विजयकरे!
इस छोटी पर भव्य कविता में निराला भारत को देवी रूप में सजाते हैं — हर पंक्ति में एक प्राकृतिक आभूषण। हर पंक्ति पर टैप कर अर्थ खोलिए।
¶भारति, जय, विजयकरे! · निराला
भारति, जय, ! !
, सागर-जल ! ,
; ।
, , , !
Tap any underlined word for its meaning. Tap ▶ to hear a sentence.
कविता की भाव-यात्रा
♥Emotional Arc
गौरव · intensity 5/5
“भारति, जय, विजयकरे!”
विजय की कामना के साथ देशगौरव का उद्घोष।
startend
✓Check Your Understanding
रुकिए और सोचिए —
"धोता शुचि चरण युगल / स्तव कर बहु-अर्थ-भरे!" — इन पंक्तियों में सागर के बारे में क्या कहा गया है?
Quick Check
Q1."कनक-शस्य-कमलधरे" पंक्ति भारत की किस विशेषता की ओर संकेत करती है?
इस छोटी पर भव्य कविता में निराला भारत को देवी रूप में सजाते हैं — हर पंक्ति में एक प्राकृतिक आभूषण। हर पंक्ति पर टैप कर अर्थ खोलिए।
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भारति, जय, ! !
, सागर-जल ! ,
; ।
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कविता की भाव-यात्रा
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गौरव · intensity 5/5
“भारति, जय, विजयकरे!”
विजय की कामना के साथ देशगौरव का उद्घोष।
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"धोता शुचि चरण युगल / स्तव कर बहु-अर्थ-भरे!" — इन पंक्तियों में सागर के बारे में क्या कहा गया है?
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