कविता — भाग १ (जागरण और बचपन)
कविता की टेक (refrain)
हर छंद के अंत में यह दो पंक्तियाँ बार-बार आती हैं — यही कविता की टेक है:
भाग १ — सोई तलवार जाग उठी
कविता 1857 के जागरण से शुरू होती है, फिर लक्ष्मीबाई के निडर बचपन को दिखाती है। हर पंक्ति पर टैप कर अर्थ देखिए।
सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने थी, बूढ़े भारत में भी आई फिर से थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने थी। चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी,
कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन '' थी, लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी, उसकी यही सहेली थी। वीर शिवाजी की उसको याद ज़बानी थीं,
रुकिए और सोचिए —
लक्ष्मीबाई का बचपन दूसरी लड़कियों से कैसे अलग था?
Q1."सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी" किस बात का चित्र है?
कविता की टेक (refrain)
हर छंद के अंत में यह दो पंक्तियाँ बार-बार आती हैं — यही कविता की टेक है:
भाग १ — सोई तलवार जाग उठी
कविता 1857 के जागरण से शुरू होती है, फिर लक्ष्मीबाई के निडर बचपन को दिखाती है। हर पंक्ति पर टैप कर अर्थ देखिए।
सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने थी, बूढ़े भारत में भी आई फिर से थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने थी। चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी,
कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन '' थी, लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी, उसकी यही सहेली थी। वीर शिवाजी की उसको याद ज़बानी थीं,
रुकिए और सोचिए —
लक्ष्मीबाई का बचपन दूसरी लड़कियों से कैसे अलग था?
Q1."सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी" किस बात का चित्र है?