कविता — भाग २ (वैधव्य और हड़प)
विवाह के बाद ख़ुशियाँ आईं, पर जल्द ही दुख और अन्याय का दौर शुरू हुआ — रानी विधवा हुईं, और अंग्रेज़ों ने झाँसी हड़प ली। हर पंक्ति पर टैप कीजिए।
उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजयाली छाई, किंतु कालगति चुपके-चुपके घेर लाई, रानी विधवा हुई हाय! को भी नहीं दया आई।
झाँसी का तब डलहौजी मन में हरषाया, करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया, बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया। अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई थी,
रुकिए और सोचिए —
"लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया" किस नीति की ओर संकेत करता है?
Q1.राजा की मृत्यु के बाद रानी की क्या दशा हुई?
विवाह के बाद ख़ुशियाँ आईं, पर जल्द ही दुख और अन्याय का दौर शुरू हुआ — रानी विधवा हुईं, और अंग्रेज़ों ने झाँसी हड़प ली। हर पंक्ति पर टैप कीजिए।
उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजयाली छाई, किंतु कालगति चुपके-चुपके घेर लाई, रानी विधवा हुई हाय! को भी नहीं दया आई।
झाँसी का तब डलहौजी मन में हरषाया, करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया, बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया। अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई थी,
रुकिए और सोचिए —
"लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया" किस नीति की ओर संकेत करता है?
Q1.राजा की मृत्यु के बाद रानी की क्या दशा हुई?