कविता — भाग ३ (क्रांति, युद्ध और बलिदान)
अब क्रांति की आग पूरे देश में फैलती है, रानी अंतिम साँस तक लड़ती हैं, और वीरगति पाकर अमर हो जाती हैं। हर पंक्ति पर टैप कीजिए।
महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी, यह स्वतंत्रता की अंतरतम से आई थी, झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थीं, मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी।
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार, घायल होकर उसे पानी थी,
जाओ रानी याद रखेंगे हम भारत वासी, यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता , तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी,
कविता की भाव-यात्रा
रुकिए और सोचिए —
"महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी" किस बात पर ज़ोर देता है?
Q1.1857 की क्रांति की लपटें किन-किन शहरों में फैलीं?
अब क्रांति की आग पूरे देश में फैलती है, रानी अंतिम साँस तक लड़ती हैं, और वीरगति पाकर अमर हो जाती हैं। हर पंक्ति पर टैप कीजिए।
महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी, यह स्वतंत्रता की अंतरतम से आई थी, झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थीं, मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी।
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार, घायल होकर उसे पानी थी,
जाओ रानी याद रखेंगे हम भारत वासी, यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता , तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी,
कविता की भाव-यात्रा
रुकिए और सोचिए —
"महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी" किस बात पर ज़ोर देता है?
Q1.1857 की क्रांति की लपटें किन-किन शहरों में फैलीं?