परिचय — लेखक से मिलिए
कभी आपको कोई निबंध या लेख लिखना पड़ा हो और समझ ही न आया हो कि "क्या लिखूँ, कहाँ से शुरू करूँ"? उस उलझन को याद कीजिए — यही उलझन इस निबंध का विषय है।
किसी ख़ाली पन्ने के सामने बैठने का अनुभव सोचिए।
आत्मपरक निबंध की शैली
यह एक आत्मपरक निबंध है — जहाँ लेखक स्वयं पाठकों से सीधे बातचीत करता है, अपनी उलझन साझा करता है। यही "मैं तुमसे बात कर रहा हूँ" वाली शैली निबंध को जीवंत और आत्मीय बना देती है।
इस निबंध का नायक ख़ुद लेखक है, जिसे दो विषयों पर निबंध लिखने हैं — "दूर के ढोल सुहावने होते हैं" और "समाज-सुधार"। लिखने से पहले आइए कुछ कठिन शब्द जान लें।
Q1.पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी किस विधा के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं?
कभी आपको कोई निबंध या लेख लिखना पड़ा हो और समझ ही न आया हो कि "क्या लिखूँ, कहाँ से शुरू करूँ"? उस उलझन को याद कीजिए — यही उलझन इस निबंध का विषय है।
किसी ख़ाली पन्ने के सामने बैठने का अनुभव सोचिए।
आत्मपरक निबंध की शैली
यह एक आत्मपरक निबंध है — जहाँ लेखक स्वयं पाठकों से सीधे बातचीत करता है, अपनी उलझन साझा करता है। यही "मैं तुमसे बात कर रहा हूँ" वाली शैली निबंध को जीवंत और आत्मीय बना देती है।
इस निबंध का नायक ख़ुद लेखक है, जिसे दो विषयों पर निबंध लिखने हैं — "दूर के ढोल सुहावने होते हैं" और "समाज-सुधार"। लिखने से पहले आइए कुछ कठिन शब्द जान लें।
Q1.पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी किस विधा के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं?