कविता — भाग १ (बारिश और घर की याद)
भाग १ — पानी गिरता है, घर याद आता है
लगातार बरसते पानी के साथ कवि का मन घर की यादों से घिरने लगता है — भाई-बहन, और सबसे पहले माँ। हर पंक्ति पर टैप कर अर्थ देखिए।
आज पानी गिर रहा है, है, रात-भर गिरता रहा है, रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, है, घर कि घर में चार भाई, , बहिन आई बाप के घर, हाय रे !
और माँ बिन-पढ़ी मेरी, दुख में वह गढ़ी मेरी, माँ कि जिसकी गोद में सिर, रख लिया तो दुख नहीं फिर,
रुकिए और सोचिए —
कवि अपने घर को "परिताप के घर" क्यों कहता है?
Q1.बारिश के साथ कवि के मन में क्या होता है?
भाग १ — पानी गिरता है, घर याद आता है
लगातार बरसते पानी के साथ कवि का मन घर की यादों से घिरने लगता है — भाई-बहन, और सबसे पहले माँ। हर पंक्ति पर टैप कर अर्थ देखिए।
आज पानी गिर रहा है, है, रात-भर गिरता रहा है, रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, है, घर कि घर में चार भाई, , बहिन आई बाप के घर, हाय रे !
और माँ बिन-पढ़ी मेरी, दुख में वह गढ़ी मेरी, माँ कि जिसकी गोद में सिर, रख लिया तो दुख नहीं फिर,
रुकिए और सोचिए —
कवि अपने घर को "परिताप के घर" क्यों कहता है?
Q1.बारिश के साथ कवि के मन में क्या होता है?