परिचय — कवि से मिलिए
कल्पना कीजिए — आप अपने घर से बहुत दूर हैं, बाहर ज़ोर की बारिश हो रही है, और आपको घर के हर सदस्य की याद आ रही है। आप दुखी हैं, पर नहीं चाहते कि घरवाले आपकी तकलीफ़ जानकर रोएँ — इसलिए कहलवाते हैं "मैं तो मज़े में हूँ!" सोचिए — अपनों को दुख से बचाने के लिए अपना दर्द छिपाना — क्या यह प्रेम का सबसे बड़ा रूप है?
किसी ऐसे पल को याद कीजिए जब आपने अपनों को दुखी न करने के लिए अपनी तकलीफ़ छिपाई हो।
साहित्य के साथ-साथ स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय कवि। प्रमुख रचनाएँ — गीत-फ़रोश, ख़ुशबू के शिलालेख, चकित है दुख, बुनी हुई रस्सी (इस पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला), गांधी-पंचशती। उन्होंने संपूर्ण गांधी वाङ्मय का भी संपादन किया।
जेल से लिखी एक चिट्ठी-सी कविता
यह कविता एक भावात्मक स्मृति-गीत है — सरल, लोकभाषा की सहज भाषा में, मानो कवि सीधे अपने मन से बात कर रहा हो। इसमें संबोधन (सावन को पुकारना) और ध्वन्यात्मक शब्द (झरा-झर, थर-थर, सर-सर) हैं जो बारिश और भावों को जीवंत कर देते हैं। यह हमारी "गंगा" पुस्तक की अंतिम कविता है।
इस कोमल कविता को पढ़ने से पहले कुछ शब्द जान लें — फिर कवि का हर भाव सीधे दिल तक पहुँचेगा।
कविता के शब्द — हर कार्ड पलटिए।
Q1.भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता कहाँ और कब लिखी?
कल्पना कीजिए — आप अपने घर से बहुत दूर हैं, बाहर ज़ोर की बारिश हो रही है, और आपको घर के हर सदस्य की याद आ रही है। आप दुखी हैं, पर नहीं चाहते कि घरवाले आपकी तकलीफ़ जानकर रोएँ — इसलिए कहलवाते हैं "मैं तो मज़े में हूँ!" सोचिए — अपनों को दुख से बचाने के लिए अपना दर्द छिपाना — क्या यह प्रेम का सबसे बड़ा रूप है?
किसी ऐसे पल को याद कीजिए जब आपने अपनों को दुखी न करने के लिए अपनी तकलीफ़ छिपाई हो।
साहित्य के साथ-साथ स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय कवि। प्रमुख रचनाएँ — गीत-फ़रोश, ख़ुशबू के शिलालेख, चकित है दुख, बुनी हुई रस्सी (इस पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला), गांधी-पंचशती। उन्होंने संपूर्ण गांधी वाङ्मय का भी संपादन किया।
जेल से लिखी एक चिट्ठी-सी कविता
यह कविता एक भावात्मक स्मृति-गीत है — सरल, लोकभाषा की सहज भाषा में, मानो कवि सीधे अपने मन से बात कर रहा हो। इसमें संबोधन (सावन को पुकारना) और ध्वन्यात्मक शब्द (झरा-झर, थर-थर, सर-सर) हैं जो बारिश और भावों को जीवंत कर देते हैं। यह हमारी "गंगा" पुस्तक की अंतिम कविता है।
इस कोमल कविता को पढ़ने से पहले कुछ शब्द जान लें — फिर कवि का हर भाव सीधे दिल तक पहुँचेगा।
कविता के शब्द — हर कार्ड पलटिए।
Q1.भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता कहाँ और कब लिखी?