कविता — भाग ३ (सावन को संदेश)
अब कविता का सबसे मार्मिक मोड़ — कवि सावन के बादल को संदेशवाहक बनाकर घर संदेश भेजता है, पर अपनी असली पीड़ा छिपाकर। हर पंक्ति पर टैप कीजिए।
, हे कि मेरे पुण्य पावन, मैं मज़े में हूँ सही है, घर नहीं हूँ बस यही है,
किंतु उससे यह न कहना, उन्हें देते धीर रहना, और कहना मस्त हूँ मैं, कातने में व्यस्त हूँ मैं, मैं।
कविता की भाव-यात्रा
रुकिए और सोचिए —
कवि सावन से अपनी असली पीड़ा घरवालों को न बताने को क्यों कहता है?
Q1.कवि घरवालों से क्या कहलवाना चाहता है?
अब कविता का सबसे मार्मिक मोड़ — कवि सावन के बादल को संदेशवाहक बनाकर घर संदेश भेजता है, पर अपनी असली पीड़ा छिपाकर। हर पंक्ति पर टैप कीजिए।
, हे कि मेरे पुण्य पावन, मैं मज़े में हूँ सही है, घर नहीं हूँ बस यही है,
किंतु उससे यह न कहना, उन्हें देते धीर रहना, और कहना मस्त हूँ मैं, कातने में व्यस्त हूँ मैं, मैं।
कविता की भाव-यात्रा
रुकिए और सोचिए —
कवि सावन से अपनी असली पीड़ा घरवालों को न बताने को क्यों कहता है?
Q1.कवि घरवालों से क्या कहलवाना चाहता है?