निबंध — भाग ३
अंत में लेखक बताता है कि देश को सबसे ज़्यादा दो चीज़ों की ज़रूरत है — शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध — और किसी देश की ऊँचाई या हीनता की असली कसौटी है चुनाव।
हमारे देश को दो बातों की सबसे पहले और सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। एक और दूसरा । जो हर समय दूसरे देशों से तुलना कर अपने देश को हीन सिद्ध करता है, वह देश के शक्ति-बोध को चोट पहुँचाता है— जैसे शल्य ने बार-बार अर्जुन की प्रशंसा करके कर्ण के में संदेह की दरार डाल दी। जो केला खाकर छिलका रास्ते में फेंकता है, गली-घर गंदा रखता है, कोनों में पीक थूकता है— वह देश के सौंदर्य-बोध को पहुँचाता है।
क्या कोई ऐसी बनाई जा सकती है, जिससे देश की उच्चता और हीनता को तोला जा सके? इस उच्चता और हीनता की कसौटी है चुनाव। जिस देश के नागरिक यह समझते हैं कि चुनाव में किसे देना चाहिए और किसे नहीं, वह देश उच्च है; जहाँ नागरिक उत्तेजक नारों के बहकावे में मत देते हैं, वह हीन है।
रुकिए और सोचिए —
लेखक के अनुसार किसी देश की उच्चता/हीनता की असली कसौटी क्या है?
लेखक छोटी-छोटी रोज़मर्रा की आदतों — केले का छिलका फेंकना, थूकना, गंदगी फैलाना — को "देश के सौंदर्य-बोध पर आघात" क्यों कहता है? क्या यह बात बढ़ा-चढ़ाकर कही गई है?
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Q1.देश को सबसे ज़्यादा किन दो चीज़ों की ज़रूरत बताई गई है?
अंत में लेखक बताता है कि देश को सबसे ज़्यादा दो चीज़ों की ज़रूरत है — शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध — और किसी देश की ऊँचाई या हीनता की असली कसौटी है चुनाव।
हमारे देश को दो बातों की सबसे पहले और सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। एक और दूसरा । जो हर समय दूसरे देशों से तुलना कर अपने देश को हीन सिद्ध करता है, वह देश के शक्ति-बोध को चोट पहुँचाता है— जैसे शल्य ने बार-बार अर्जुन की प्रशंसा करके कर्ण के में संदेह की दरार डाल दी। जो केला खाकर छिलका रास्ते में फेंकता है, गली-घर गंदा रखता है, कोनों में पीक थूकता है— वह देश के सौंदर्य-बोध को पहुँचाता है।
क्या कोई ऐसी बनाई जा सकती है, जिससे देश की उच्चता और हीनता को तोला जा सके? इस उच्चता और हीनता की कसौटी है चुनाव। जिस देश के नागरिक यह समझते हैं कि चुनाव में किसे देना चाहिए और किसे नहीं, वह देश उच्च है; जहाँ नागरिक उत्तेजक नारों के बहकावे में मत देते हैं, वह हीन है।
रुकिए और सोचिए —
लेखक के अनुसार किसी देश की उच्चता/हीनता की असली कसौटी क्या है?
लेखक छोटी-छोटी रोज़मर्रा की आदतों — केले का छिलका फेंकना, थूकना, गंदगी फैलाना — को "देश के सौंदर्य-बोध पर आघात" क्यों कहता है? क्या यह बात बढ़ा-चढ़ाकर कही गई है?
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Q1.देश को सबसे ज़्यादा किन दो चीज़ों की ज़रूरत बताई गई है?