पद १ — अब कैसे छूटै राम रट लागी
पद १ — "तुम चंदन, हम पानी"
पहले पद में रैदास सुंदर उपमाओं से बताते हैं कि भक्त और आराध्य का संबंध कितना अटूट है — जैसे चंदन और पानी, बादल और मोर, दीपक और बाती, एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकते। हर पंक्ति पर टैप कर अर्थ देखिए।
अब कैसे छूटै राम लागी। प्रभु जी तुम , जाकी अंग-अंग । प्रभु जी तुम , जैसे ।
प्रभु जी तुम , जाकी । प्रभु जी तुम , जैसे । प्रभु जी तुम , ऐसी भगति करै रैदासा।
पद की भाव-यात्रा
रुकिए और सोचिए —
"तुम चंदन हम पानी" उपमा से रैदास क्या कहना चाहते हैं?
Q1.पद १ में रैदास भक्त-प्रभु के संबंध को किस रूप में दिखाते हैं?
पद १ — "तुम चंदन, हम पानी"
पहले पद में रैदास सुंदर उपमाओं से बताते हैं कि भक्त और आराध्य का संबंध कितना अटूट है — जैसे चंदन और पानी, बादल और मोर, दीपक और बाती, एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकते। हर पंक्ति पर टैप कर अर्थ देखिए।
अब कैसे छूटै राम लागी। प्रभु जी तुम , जाकी अंग-अंग । प्रभु जी तुम , जैसे ।
प्रभु जी तुम , जाकी । प्रभु जी तुम , जैसे । प्रभु जी तुम , ऐसी भगति करै रैदासा।
पद की भाव-यात्रा
रुकिए और सोचिए —
"तुम चंदन हम पानी" उपमा से रैदास क्या कहना चाहते हैं?
Q1.पद १ में रैदास भक्त-प्रभु के संबंध को किस रूप में दिखाते हैं?