परिचय — कवि से मिलिए
जब आप किसी से बहुत गहरा प्रेम करते हैं — माँ, कोई दोस्त, या ईश्वर — तो लगता है मानो आप दोनों एक-दूसरे से अलग ही नहीं हो सकते। रैदास भी अपने प्रभु से ऐसा ही अटूट नाता महसूस करते हैं। सोचिए — किस चीज़/व्यक्ति से आप ऐसा "अलग न हो पाने" वाला जुड़ाव महसूस करते हैं?
किसी ऐसे रिश्ते के बारे में सोचिए जो आपको "अटूट" लगता है।
भक्तिकाल और निर्गुण धारा
भक्तिकाल हिंदी साहित्य का वह युग है जब संत कवियों ने ईश्वर-प्रेम, समानता और भाईचारे के गीत गाए। रैदास निर्गुण धारा के संत हैं — वे निराकार (बिना रूप के) ईश्वर की भक्ति पर बल देते हैं, और जाति-पाँति, आडंबर, छुआछूत के विरुद्ध आवाज़ उठाते हैं।
"पद" एक छोटी, गाई जाने योग्य (गेय) काव्य-रचना है। पढ़ने से पहले इन पुराने ब्रजभाषा के शब्दों को जान लें — फिर पद का आनंद और गहरा होगा।
Q1.रैदास किस काल/धारा के संत कवि हैं?
जब आप किसी से बहुत गहरा प्रेम करते हैं — माँ, कोई दोस्त, या ईश्वर — तो लगता है मानो आप दोनों एक-दूसरे से अलग ही नहीं हो सकते। रैदास भी अपने प्रभु से ऐसा ही अटूट नाता महसूस करते हैं। सोचिए — किस चीज़/व्यक्ति से आप ऐसा "अलग न हो पाने" वाला जुड़ाव महसूस करते हैं?
किसी ऐसे रिश्ते के बारे में सोचिए जो आपको "अटूट" लगता है।
भक्तिकाल और निर्गुण धारा
भक्तिकाल हिंदी साहित्य का वह युग है जब संत कवियों ने ईश्वर-प्रेम, समानता और भाईचारे के गीत गाए। रैदास निर्गुण धारा के संत हैं — वे निराकार (बिना रूप के) ईश्वर की भक्ति पर बल देते हैं, और जाति-पाँति, आडंबर, छुआछूत के विरुद्ध आवाज़ उठाते हैं।
"पद" एक छोटी, गाई जाने योग्य (गेय) काव्य-रचना है। पढ़ने से पहले इन पुराने ब्रजभाषा के शब्दों को जान लें — फिर पद का आनंद और गहरा होगा।
Q1.रैदास किस काल/धारा के संत कवि हैं?