पद २ — जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौं
दूसरे पद में रैदास अपनी अडिग निष्ठा दिखाते हैं — चाहे प्रभु नाता तोड़ दें, भक्त नहीं तोड़ेगा। वह तीर्थ-व्रत छोड़ सकता है, पर प्रभु-चरणों की भक्ति नहीं।
Q1.पद २ में रैदास की अपने आराध्य में कैसी निष्ठा है?
दूसरे पद में रैदास अपनी अडिग निष्ठा दिखाते हैं — चाहे प्रभु नाता तोड़ दें, भक्त नहीं तोड़ेगा। वह तीर्थ-व्रत छोड़ सकता है, पर प्रभु-चरणों की भक्ति नहीं।
Q1.पद २ में रैदास की अपने आराध्य में कैसी निष्ठा है?