कहानी — भाग १
भाग १ — दो दोस्तों की कथा
कहानी की शुरुआत प्रेमचंद एक मज़ेदार बहस से करते हैं — कि गधा सचमुच बेवक़ूफ़ है, या उसकी सहनशीलता ही उसे यह नाम दिला देती है? इसी बहस से वे हमें बैल — हीरा और मोती — तक ले आते हैं।
जानवरों में गधा सबसे ज़्यादा बुद्धिहीन समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को परले दरजे का बेवक़ूफ़ कहना चाहते हैं, तो उसे गधा कहते हैं। गधा सचमुच बेवक़ूफ़ है, या उसके सीधेपन, उसकी ने उसे यह पदवी दे दी है, इसका निश्चय नहीं किया जा सकता। उसके चेहरे पर एक स्थायी स्थायी रूप से छाया रहता है।
झूरी के दोनों बैलों के नाम थे हीरा और मोती। दोनों जाति के थे— देखने में सुंदर, काम में , में ऊँचे। दोनों एक-दूसरे को चाटकर और सूँघकर अपना प्रेम प्रकट करते, कभी-कभी दोनों सींग भी मिला लिया करते थे— के नाते से नहीं, केवल के भाव से, के भाव से।
रुकिए और सोचिए —
हीरा और मोती आपस में सींग क्यों मिलाते थे?
फिर एक दिन झूरी ने दोनों को अपने साले गया के घर भेज दिया। बैलों को यह "अपना बेचा जाना" जैसा लगा — और वे पहली रात ही रस्सी तुड़ाकर अपने घर लौट आए।
संध्या समय दोनों बैल अपने नए स्थान पर पहुँचे। दिन-भर के भूखे थे, लेकिन जब में लगाए गए, तो एक ने भी उसमें मुँह न डाला। दिल भारी हो रहा था। जिसे उन्होंने अपना घर समझ रखा था, वह आज उनसे छूट गया था।
जब गाँव में सोता पड़ गया, तो दोनों ने ज़ोर मारकर तुड़ा डाले और घर की तरफ़ चले। झूरी प्रातःकाल सोकर उठा, तो देखा कि दोनों बैल पर खड़े हैं। दोनों की गरदनों में आधा-आधा लटक रहा है और दोनों की आँखों में विद्रोहमय स्नेह झलक रहा है।
"दोनों की आँखों में विद्रोहमय स्नेह झलक रहा है।" — स्नेह (प्यार) और विद्रोह (बग़ावत) तो उलटी बातें हैं। प्रेमचंद ने इन्हें एक साथ क्यों रखा? बैलों के मन में क्या चल रहा होगा?
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Q1.झूरी ने दोनों बैलों को किसके यहाँ भेजा था?
भाग १ — दो दोस्तों की कथा
कहानी की शुरुआत प्रेमचंद एक मज़ेदार बहस से करते हैं — कि गधा सचमुच बेवक़ूफ़ है, या उसकी सहनशीलता ही उसे यह नाम दिला देती है? इसी बहस से वे हमें बैल — हीरा और मोती — तक ले आते हैं।
जानवरों में गधा सबसे ज़्यादा बुद्धिहीन समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को परले दरजे का बेवक़ूफ़ कहना चाहते हैं, तो उसे गधा कहते हैं। गधा सचमुच बेवक़ूफ़ है, या उसके सीधेपन, उसकी ने उसे यह पदवी दे दी है, इसका निश्चय नहीं किया जा सकता। उसके चेहरे पर एक स्थायी स्थायी रूप से छाया रहता है।
झूरी के दोनों बैलों के नाम थे हीरा और मोती। दोनों जाति के थे— देखने में सुंदर, काम में , में ऊँचे। दोनों एक-दूसरे को चाटकर और सूँघकर अपना प्रेम प्रकट करते, कभी-कभी दोनों सींग भी मिला लिया करते थे— के नाते से नहीं, केवल के भाव से, के भाव से।
रुकिए और सोचिए —
हीरा और मोती आपस में सींग क्यों मिलाते थे?
फिर एक दिन झूरी ने दोनों को अपने साले गया के घर भेज दिया। बैलों को यह "अपना बेचा जाना" जैसा लगा — और वे पहली रात ही रस्सी तुड़ाकर अपने घर लौट आए।
संध्या समय दोनों बैल अपने नए स्थान पर पहुँचे। दिन-भर के भूखे थे, लेकिन जब में लगाए गए, तो एक ने भी उसमें मुँह न डाला। दिल भारी हो रहा था। जिसे उन्होंने अपना घर समझ रखा था, वह आज उनसे छूट गया था।
जब गाँव में सोता पड़ गया, तो दोनों ने ज़ोर मारकर तुड़ा डाले और घर की तरफ़ चले। झूरी प्रातःकाल सोकर उठा, तो देखा कि दोनों बैल पर खड़े हैं। दोनों की गरदनों में आधा-आधा लटक रहा है और दोनों की आँखों में विद्रोहमय स्नेह झलक रहा है।
"दोनों की आँखों में विद्रोहमय स्नेह झलक रहा है।" — स्नेह (प्यार) और विद्रोह (बग़ावत) तो उलटी बातें हैं। प्रेमचंद ने इन्हें एक साथ क्यों रखा? बैलों के मन में क्या चल रहा होगा?
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Q1.झूरी ने दोनों बैलों को किसके यहाँ भेजा था?