कहानी का सौंदर्य
प्रेमचंद की भाषा कई विशेषताओं से सजी है — चित्रात्मकता, व्यंग्य, विरोधाभास, अतिशयोक्ति। नीचे के गद्यांश में ऊपर दी विशेषता पर टैप करें — उसके सभी उदाहरण रेखांकित हो जाएँगे।
ऊपर किसी विशेषता पर टैप करें — गद्यांश में उसके सभी उदाहरण रेखांकित हो जाएँगे।
कहानी का सौंदर्य — एक नज़र में
| विशेषता | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| चित्रात्मकता | शब्दों से जीवंत चित्र बनाना (imagery) | घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं। |
| संवादात्मकता | पात्रों की बातचीत से कथा आगे बढ़ना (dialogue-driven) | "मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।" |
| व्यंग्य | चुभते संकेत से दोष/पाखंड दिखाना (satire) | अगर वे ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते... |
| विरोधाभास | दो विरोधी बातें साथ (paradox) | झूरी गद्गद हुआ; स्त्री जल उठी। |
| अतिशयोक्ति | बढ़ा-चढ़ाकर कहना (hyperbole) | फूल की छड़ी से भी न छूता था। |
इस कहानी की शुरुआत में ही ऐसे कौन-से संकेत मिलते हैं जो आगे की कथा (पात्र, भाषा, मुख्य भाव) की ओर इशारा करते हैं? कम-से-कम तीन बिंदु सोचिए, फिर उत्तर देखिए।
Q1."घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं" — यह भाषा की कौन-सी विशेषता है?
प्रेमचंद की भाषा कई विशेषताओं से सजी है — चित्रात्मकता, व्यंग्य, विरोधाभास, अतिशयोक्ति। नीचे के गद्यांश में ऊपर दी विशेषता पर टैप करें — उसके सभी उदाहरण रेखांकित हो जाएँगे।
ऊपर किसी विशेषता पर टैप करें — गद्यांश में उसके सभी उदाहरण रेखांकित हो जाएँगे।
कहानी का सौंदर्य — एक नज़र में
| विशेषता | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| चित्रात्मकता | शब्दों से जीवंत चित्र बनाना (imagery) | घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं। |
| संवादात्मकता | पात्रों की बातचीत से कथा आगे बढ़ना (dialogue-driven) | "मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।" |
| व्यंग्य | चुभते संकेत से दोष/पाखंड दिखाना (satire) | अगर वे ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते... |
| विरोधाभास | दो विरोधी बातें साथ (paradox) | झूरी गद्गद हुआ; स्त्री जल उठी। |
| अतिशयोक्ति | बढ़ा-चढ़ाकर कहना (hyperbole) | फूल की छड़ी से भी न छूता था। |
इस कहानी की शुरुआत में ही ऐसे कौन-से संकेत मिलते हैं जो आगे की कथा (पात्र, भाषा, मुख्य भाव) की ओर इशारा करते हैं? कम-से-कम तीन बिंदु सोचिए, फिर उत्तर देखिए।
Q1."घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं" — यह भाषा की कौन-सी विशेषता है?